सोमवार, 8 जुलाई 2019

#खुशखबरी



सुना है गाँव में विकास हो रहा है, अब सड़के गाँव तक पहुँच रही हैं। कितनी ख़ुशी की बात है ना!! अब सभी ग्रामीण शहर की ओर अपना रुख मोड़ लेंगे और सभी पर्यटक और उद्योगपति गाँवों की तरफ। अब अगर सड़कों को गाँव की ओर मोड़ना है तो सड़कों के लिए तो प्रयाप्त जगह की आवश्यकता होगी ही और इस आवश्यकता की पूर्ति गाँव के लोगों और किसानों के खेतों से की जायेगी। देखा जाये तो इसमें कोई हर्ज़ भी नहीं है, भई अगर गाँव का विकास चाहते हो, गाँव तक सड़के चाहते हो तो खेतों की क़ुरबानी करनी ही पड़ेगी। अरे भई कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी तो पड़ता है.....है कि नहीं।
      अब सड़के बननी शुरू हो गई हैं तो लोगों की आवा-जावी तो होगी ही। और तो और कहीं कहीं तो बन के तैयार होने को है और लोग भी गाँवों की ओर आने लगे हैं। अब तो बस एक ही काम रह गया है, ये जो गाँव के विकास के नाम पर शहर बसाये जा रहे हैं, इनका नाम भी  बदल कर शहरी कर दिया जाये। अब माना भले ही गाँव वाले भोले होते हैं पर मुर्ख थोड़ी होतें हैं कि वो समझ न सके की गाँव का विकास हो रहा है या गाँवों का शहरीकरण।
      हाँ पर हमें इस के लिए सरकार को दोष नही देना चाहिए। माँग तो हमारी ही थी की गाँवों का भी शहरों जैसा विकास हो अर्थात गाँव में भी बिजली की व्यवस्था हो, हर घर में शौचालय हो और गाँव के हर व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए हर गाँव में एक-एक सरकारी कार्यालय हो। पर शायद हमारा संप्रेक्षण सही अर्थ में सरकार तक पहुँच नहीं पाया। इसी लिए सरकार ने गाँवों के विकास का कार्य शुरू तो किया पर अपने तरीके से। पहले गाँव तक सड़के आई, जिसमे कई गाँव वालों के खेत और घर चले गये, फिर जब रहने और खाने को कुछ रहा नहीं तो लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया। लोग अपना घर-परिवार ले कर शहर की ओर विस्थापित होने लगे। जब धीरे-धीरे गाँव खली होने लगे तो बाकि की बचि उस ज़मीं पर औद्योगपतियों ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। कुछ इस तरह हुआ गाँवों का शाहरिक.......मतलब गाँवों का विकास।

सोमवार, 1 जुलाई 2019

आई वांट टू ड्रा म्युज़िक एंड आई वांट टू सिंग पेंटिंग...


"सावन के अंधे को सब जगह हरा ही दीखता है" वैसे ही कला के प्रेमी को भी हर जगह कला ही दिखती है। एक अच्छा कलाकार ही हर जगह अपनी प्रतिभा दिखा सकता है। फिर चाहे वो चित्रकार हो, संगीतकार हो, शिल्पकर हो या नृतक।
एक कलाकार और लेखक ही है जो अपने चिंतन से किसी भी नई चीज/दृश्य का सृजन कर सकता है और अपनी सृजनात्मकता के ज़रिये अनहोनी को होनी में तब्दील करने का रुतबा रखता है। जब एक चित्रकार अपने औज़ारों को अपने हाथ में लेता है तो यह सोचकर कभी नहीं लेता कि आसमान नील रंग का होता है तो मैं भी नीला रंग ही करूँगा या पत्तियां केवल हरे रंग की ही होती है। एक चित्रकार हमेशा अपने औज़ारों को यह सोच कर हाथ में लेता है कि जब मेरा काम पूरा हो जायेगा या चित्र पूरा होने के बाद जब मैं पीछे हटूंगा तो सारी दुनिया उस चित्र को देखने के लिए आगे बढ़ेगी। यह हर कलाकार की इच्छा होती है कि मैं एक सुन्दर और अकाल्पनिक चित्र का निर्माण करू जिसे देख हर व्यक्ति की भावात्मकता का उजागर हो।
अगर हम बात करे संगीत की तो इसे सदियों से लोगों की भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम मना गया है। फिर चाहे वो प्रेमरोग हो या वियोग, दुःख की घड़ी हो या हर्षोउल्लास का जशन। हर व्यक्ति अपने सभी भावों को संगीत के माध्यम से प्रकट करता है। यह एक कलाकार की खूबी ही है कि यदि कोई सृजनात्मक चित्रकार अगर किसी म्यूज़िक/गाने को सुनता है तो उसके ज़हन में सबसे पहले एक ही ख्याल आता है- "आई वांट टू ड्रा दिस म्युज़िक"। उसी तरह जब एक रचनात्मक संगीतकार किसी चित्र को देखता है तो वह यह इच्छा रखता है- "आई वांट टू सिंग दिस पेंटिंग"। हर कलाकार हर कला में अपनी कला का अनुभव करता है यही एक कलाकार की खूबी होती है।
यू तो अगर हम "गूगल" पर "कला क्या है?" सर्च करें तो भी हमे पता चल जायेगा कि "कला क्या है?" गूगल भी आप को कला से परिचित करवा देगा, पर वह केवल आप को कला की एक लिखित परिभाषा से अवगत कराएंगा। यदि गूगल ही कला का परिचय करा दे तो सब ही कलाकार नहीं कहलाएंगे? कला एक प्राथमिक गुण है जो किसी न किसी रूप में सभी के पास विद्यमान रहती है। बस उसे परखने की देरी है। जैसे किसी को चित्र बनाना पसंद है, किसी को गाने सुनना और गाना, किसी को खाना बनाना और किसी को किताबें पड़ना और किसी को लोगों को हँसाना। हमे जो कार्य करना अच्छा लगता है या पसंद होता है वो भी हमारी कला में सुमार हो जाता है पर बशर्तें वो हमारी मज़बूरी न हो तो। कला के आभाव में व्यक्ति बिना सींग और पूछ का पशु कहलाता है। संस्कृत में यही पंक्तिया कुछ इस प्रकार हैं-साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात् पशु: पुच्छविषाणहीन:।।
इसीलिए कला तो हर व्यक्ति में होती है पर कल को परखना उसे आना चाहिए।