गुरुवार, 13 अगस्त 2020

रूठ ना जाना "मैं जो कहूँ तो"



कहाँ एक हफ़्ते का मिडसेमेस्टर ब्रेक और कहाँ ये लॉकडाउन! महामारी के इन पाँच महीनों में मैंने गिनी-चुनी किताबें पढ़ीं। मैंने इन्हीं किताबों के सहारे से 'दिल्ली से कलकत्ता' की सैर की लेकिन पैदल नहीं बल्कि एक डगमग डोंगी में जहाँ मैं एक सामान्य-सी परंतु विशेष महिला "कविता" से मिली। "विशेष" और "सामान्य" जैसे शब्दों का इस्तेमाल इस लिए कर रही हूँ क्योंकि वो सब के लिए एक सामान्य-सी औरत है पर मेरे लिए एक विशेष स्त्री है। ख़ैर, अपना ये सफ़रनामा मैं फिर कभी दुबारा सुनाऊँगी। अभी तो इस लॉकडाउन सफ़र में थोड़ा और घूमना है और कुछ न कुछ नया करते रहना है। और वैसे भी खाली बैठे शरीर भले ही सुस्त हो जाये पर दिमाग एक दम तेज़ हो जाता है। ऐसे में तेज़ दिमाग में आने वाले विचारों को कुछ सहेज के, सजा के अच्छे से प्रस्तुत किया जाए तो शायद कुछ बढ़िया मिल जाये! घर पर बैठे मन यादें बुनने लगता है, ऐसी ही कुछ यादें मेरे दिलोदिमाग में भी हैं। उन्ही में से एक किस्सा आपको भी सुनाती हूँ।     


आपको "शीर्षक" थोड़ा अटपटा लग रहा होगा लेकिन नीचे लिखे लेख को पढ़कर समझ आ जाएगा। यह लेख "सूरज कुंड मेले" पर लिखा गया है। लेख को यह शीर्षक एक याद की तौर पर दिया गया है।

      आपने अमूमन यह गाना "ऐसा देश है मेरा" सुना होगा... वर्ष 2004 में आई फ़िल्म "वीर-ज़ारा" के इस गाने में मेले की खूबसूरती को परंपरागत भारतीय संस्कृति के अनुसार बखूबी दर्शाया गया है। ऐसी ही एक खूबसूरत भरतीय संस्कृति से आज मैं आपको मिलवाने जा रही हूँ। आपका अपने कस्बे में लगने वाले मेले से मन ऊभ गया हो तो हरियाणा राज्य स्थित फरीदाबाद शहर में लगने वाले सूरज कुंड मेले का साक्षात दर्शन करने ज़रूर जाइएगा। सन् 1987 में शुरू हुआ यह मेला जिसकी उम्र आज तकरीबन 34 वर्ष की हो गई है, उतनी ही खूबसूरती समटे हुए है, जितना कि यह 1987 में प्रसिद्ध था बल्कि हर साल इसकी लोकप्रियता में और चार-चांद लग जाते हैं। इस साल हुए सूरज कुंड मेले की थीम हिमाचल प्रदेश रखी गई थी जिसे देखने के लिए लाखों की जनसंख्या में वहां पर जुलूस उमड़ पड़ा। दर्शकों ने हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को मेले में अनुभव किया। इस बार इन दर्शकों का हिस्सा मैं भी बनी। जो लोग गए वो मेले का लुत्फ उठा आए और जो नहीं जा सके उन्हें लिए चलती हूँ मैं अपने इस लेख के ज़रिए।

      भिन्न-भिन्न कलाकारों की कलाकारी से सुसज्जित इस मेले में अनगिनत लोग, ढेर सारे झूले, खाने-पीने को कई प्रकार का खाना-पीना और चाट। खरीदारी करने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों की मशहूर वस्तुएं व व्यंजन मिल रहे होते हैं। लाल-पीले, हरे-भूरे रंग के बालों वाले विदेशी दर्शक आपका-हमारा, हम सभी का मन मोह लेते हैं। हर साल बुजुर्गों सहित छात्रों, दिव्यांगजनों के लिए ऑनलाइन/ऑफ़लाइन टिकट बुकिंग करने पर 50 प्रतिशत की छूट रहती है जो कि हर साल के लिए तय राशि है। थोड़ा लालच, थोड़ा उल्लास लिए परिजन अपने प्रियजनों को मेले में झूला झुलाने के लिए और कुछ अपने प्रेम रस में चाट का चटपटा रस घोल, स्वाद में इज़ाफ़ा लिए बेहद खुश दिखाई पड़ते हैं। युवाओं का क्या ही कहना! कुछों को सेल्फी-सेल्फी खेलने से फुरसत नहीं होती है तो कुछ अपनी यारी-दोस्ती में मशगूल मेले का लुत्फ़ उठाते नज़र आते हैं। आपको मेले में कुछ ऐसे छोटे बच्चे तथा युवा भी देखने को मिल जाएंगे जिन्होंने शायद अरसों से ढोल-नगाड़ों की धम-धम, डम-डम की आवाज नहीं सुनी होती है जिस वजह से उनके पैर रुके नहीं बल्कि ढोल-नगाड़ों की आवाज पर थिरकते नज़र आते हैं।

      नज़ारा कुछ यूँ होता है कि 50-50 रुपए में पगड़ी/साफा बांधा जा रहा होता है। अब सिर्फ 50 रुपए में मुखिया वाली फील मिल जाए फिर तो वाह! जी वाह! जिस नई पीढ़ी ने कभी मिट्टी के बर्तनों में खाना-पीना न किया हो वही पीढ़ी मेले में कुम्हार के चक्र पर मिट्टी का मटका बना रही होती है और अपने दोस्तों से उस आत्मीयता को स्पर्श करने वाले माहौल का वीडियो बनवा रही होती है। मैंने मेले में जितना कुछ देखा आपको बताने की पूरी कोशिश की लेकिन एक नज़ारा मेरे ज़हन से उतारे नहीं उतरता है। हुआ यूँ कि एक लड़का अपनी रूठी दोस्त को मानने के लिए वहीं मेले में बीच सड़क पर पंथी लगाकर बैठ गया लेकिन लड़की भी ढीठ थी माने नहीं मान रही थी। देख कर अच्छा लगा और ख्याल आया...... खैर कहीं न कहीं मानना-मनाना मॉर्डन युग में भी बाकी है वरना आज रूठे हुए को पूछता कौन है! शायद इसीलिए लोगों ने ज़्यादातर रूठना बंद कर दिया।

      मेले में कई रंग नए देखने को मिले जो इससे पहले मैंने नहीं देखे थे जिनमें से कई रंग मैं अपनी यादों में समेट लाई हूँ और बिखेर दिए हैं अपने इस छोटे से लेख के ज़रिए आप के सामने।


21 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया विद्या
    लिखते रहो

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत खूबसूरत शब्दों से बांधा है विद्या। ऐसे ही आगे बढ़ो। पढ़ के दिल खुश हुआ।

    जवाब देंहटाएं